थॉमस अल्बा एडिसन के बारे में कुछ रोचक तथ्य।


थॉमस अल्बा एडिसन का जन्म 11 फरबरी 1847 को संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था। उनकी माता का नाम सैमुअल ऑग्डन एडिसन तथा पिता का नाम नैन्सी मैथ्यू एलियट था। वे अपने माता पिता की सातवीं संतान थे। 
थॉमस अल्बा एडिसन एक महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने  अपने जीवन में हजारों अविष्कार किये थे। विद्युत बल्ब का अविष्कार इनका महान अविष्कार था। 
आज हम जानेंगे एडिसन के जीवन की कुछ ऐसी घटनाएं जो आपको प्रेरणा से भर देंगे। 


थॉमस अल्बा एडिसन के बारे में कुछ रोचक तथ्य।


1-महान एडिशन अपनी खोजों में इस प्रकार खोए रहते थे कि कई दिनों तक प्रयोगशाला से बाहर भी नहीं निकलते थे। यहां तक कि अपना भोजन भी वही मंगा लेते थे। कई बार तो उनकी पत्नी यह देखकर उनसे नाराज भी हो जाती थीं। काफी दिनों बाद एडिसन जब अपनी प्रयोग से बाहर आए तो उनकी पत्नी ने उन्हें सलाह दी "आप दिन-रात काम में लगे रहते हैं कभी-कभी दो-चार दिन की छुट्टी भी ले लिया करो"।
एडिशन ने कहा "वह तो ठीक है लेकिन मैं छुट्टी लेकर जाऊंगा कहां"। 
पत्नी "जहां आपका मन करे"।
फिर एडिशन ने कहा "तो फिर मैं वही जाता हूं"।
यह कहकर एडिशन पुनः अपनी प्रयोगशाला में चले गए।

2-एडिशन को बचपन से ही एक घटना के चलते कम सुनाई देता था। इसके बावजूद एडिशन हमेशा अपने कार्यों में लीन रहते और एक महान वैज्ञानिक के रूप में दुनिया के सामने आए। उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया। उन्होंने अपने बचपन में अखबार तथा सब्जियां भी बेचीं। एडिसन ने अपने बहरेपन को अपनी कमजोरी ना मानकर इसे एक वरदान के रूप में लिया। एडिशन कहते हैं "मुझे इस बात की खुशी है कि बहरापन मुझे, लोगों की फिजूल की बातों को सुनने से वंचित कर दिया। मैं जब भी कहीं जाता हूं तो लोग गपशप करते रहते हैं, और मैं अपनी समस्याओं के बारे में सोचता रहता हूं। अगर मैं भी उन फिजूल की बातों का सुनता तो शायद आज मुझमें उतना मनोबल ना होता"। इस प्रकार एडिसन ने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाई।

3-एक बार एडिशन फोनोग्राम के आविष्कार में व्यस्त थे कि एक समस्या आन पड़ी उन्होंने इसका समाधान अपने एक सहायक को करने के लिए दे दिया। वह 2 सालों तक लगातार इसका समाधान खोजता रहा लेकिन वह इसका समाधान ना कर सका। वह एडिसन के पास पहुंचा और कहा "मिस्टर एडिसन मैंने आपके हजारों डॉलर तथा अपने जीवन के 2 साल इसमें खपाए हैं। यदि इसका कोई हल होता तो अब तक मैं निकाल लेता। मैं इस्तीफा देना चाहता हूं। एडिसन ने कहा " मुझे पता है कि हर समस्या जो ईश्वर ने हमें दी है उन सब का हल उसके पास है। हम भले ही उन्हें निकालने में असमर्थ हों लेकिन एक ना एक दिन इसका कोई ना कोई उत्तर जरूर मिलेगा। वापस जाओ और कुछ समय मेहनत और करो"।

4-एक बार किसी ने एडिसन से पूछा "आपको इतना ज्यादा ज्ञान कैसे हो गया"। 
एडिशन का जवाब था "दूसरों से यह कहकर कि मैं कुछ नहीं जानता और यही कि मैं जानना चाहता हूँ 

5-एक बार एडीसन की प्रयोगशाला में आग लग गई। कई जरूरी कागजात जलकर खाक हो गए। लगभग 15 से 20 लाख डॉलर  के उपकरण नष्ट हो गए। एडिशन का पुत्र यह सब दुख भरी निगाहों से देख रहा था। 
एडिसन ने उसे कहा कि, "जाओ अपनी मां को भी बुला लाओ ऐसा दृश्य जीवन में कभी देखने को नहीं मिलेगा"। 
अगले दिन उसी की राख में घूमते हुए एडिसन ने कहा "नुकसान का भी फायदा होता है, हमारी भूले जलकर राख हो गई हैं। मैं इसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहता हूं अब हम नए सिरे से काम शुरू कर सकेंगे"।

6-एक बार एडिशन बैटरी पर कुछ प्रयोग कर रहे थे। एक दिन एक पत्रकार उनसे मिलने आया। एडिसन ने उसे बताया कि वह 20000 प्रयोग कर चुके हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिली। पत्रकार ने आश्चर्य से पूछा "इतने प्रयास विफल होने के बाद भी आप हिम्मत नहीं हारे"
"विफल!" एडिसन ने विस्मय से पूछा। 
एडिसन ने कहा, "विफल कुछ भी नहीं हुआ है। मैंने वह 20000 आविष्कार किए जो हमारे काम के नहीं हैं। "

7-एडिसन अपने प्रयोगों मैं इस कदर विलीन रहते थे कि कभी-कभी सारी रात प्रयोगशाला में काम करते तथा रात में भोजन भी ना करते। एक बार सुबह नाश्ता करते हुए उन्हें अचानक झपकी आ गई तभी उनके नौकर को मजाक सूझी और उसने मेज पर खाली प्लेट रखकर भरी प्लेट हटा दी। जब एडिसन की नींद खुली तो उन्होंने मन ही मन यह निष्कर्ष निकाला कि मैने नाश्ता कर लिया है। इसके बाद वे पुनः काम में जुट गये। 

8-एडीसन के दोस्त उनकी सिगार मुफ्त में पी जाया करते थे। तंग आकर एडिसन ने नौकर को दुर्गंध युक्त शिकार बनाने का ऑर्डर दे दिया। ताकि वह अपने दोस्तों को मुफ्त की चीजें उड़ाने का मजा चखाना चाहते थे। कुछ दिनों बाद जब उन्हें नौकर मिला तो उन्होंने शिगार ना भेजे जाने की शिकायत की और आग्रह किया कि शीघ्र ही वह शिगार भेज दें। 
नौकर हैरान था "सर मैंने आज से 3 हफ्ते पहले ही शिकार के पैकेट भेज दिए थें"।
वास्तव में अपने काम में व्यस्त एडिशन सारे रद्दी सिगार पी चुके थे। इससे स्पष्ट होता है कि एडिशन इस कदर अपने प्रयोग में व्यस्त रहते थे कि उन्हें किसी भी चीज का ध्यान ही ना रहता।

आज आपने जाना की महान वैज्ञानिक किसे अपने कार्य में इतना व्यस्त रहते हैं की उन्हें किसी भी चीज़ की परवाह नहीं होती वो केवल अपने काम में ध्यान देते हैं। जो उनकी सफलता का सबसे बड़ा रहस्य है।
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हम अगले लेख में हाजिर होंगे अल्बर्ट आइंस्टीन की कुछ रोचक जानकारी लेकर तबतक खुश राहिये और कुछ नया सीखते रहिये।
सधन्यबाद!

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